1- एनएचपीसी के पावर चैनल में रिसाव, बिजली उत्पादन ठप्प

(टनकपुर हाइड्रो पावर परियोजना - Danik Jagran, July 01, 2008)

2- धमाकों से उजाड़ी थिरांग की खुशहाली

(लोहारीनाग-पाला जल विद्युत परियोजना - Danik Jagran, Jun 29, 2008)

3- विद्युत उत्पादन में अनिश्चितता का दौर

(उत्तराखंड की जल विद्युत परियोजनाएं - Danik Jagran, Jul 04, 2008)

4- जल विद्युत परियोजना प्रभावितों ने निर्माण कार्य रोका

(सिंगोली-भटवाड़ी जलविद्युत परियोजना - Danik Jagran, Jul 04, 2008)

5- जल विद्युत परियोजनाओं पर पंचायतों को हो अधिकार

(Danik Jagran, Jul 13, 2008)

6- चाई गांव के पुनर्वास की मांग उठेगी

(Danik Jagran, Jul 13, 2008)

7- विलुप्ति के कगार पर पहुंचे घराट

(Danik Jagran, Jul 10, 2008)

8- अलकनंदा में मलबा ही मलबा

(श्रीनगर जल विघुत परियोजना, Rashtriya Sahara, Jul 15, 2008)

9- जलविद्युत परियोजना का कार्य हुआ तो आंदोलन

(देवसारी जलविद्युत परियोजना, Danik Jagran, Jul 22, 2008

10- सोने के अंडे नहीं, मुर्गी पर नजर

(जलविद्युत परियोजनाओं को पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप मोड में करने का फैसला , Danik Jagran, Jul 25, 2008

11- बोल्डर गिरने से 1200 किलोवाट की कुलागाड़ जल विद्युत परियोजना क्षतिग्रस्त

(1200 किलोवाट की कुलागाड़ जल विद्युत परियोजना , Danik Jagran, Jul 26, 2008

12- मनेरी भाली: ठगे गए प्रभावित बेरोजगार

(304 मेगावाट की मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना द्वितीय चरण , Danik Jagran, Jul 30, 2008

1- एनएचपीसी के पावर चैनल में रिसाव, बिजली उत्पादन ठप्प

Source: http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_4591697.html
July 01, 12:31 am

टनकपुर (चंपावत)। टनकपुर जल विद्युत परियोजना के पावर चैनल के दो भागों में रिसाव होने से बिजली उत्पादन ठप्प हो गया है। एनएचपीसी प्रशासन ने युद्व स्तर पर रिसाव के मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है। शनिवार रात्रि एनएचपीसी पावर हाउस के करीब पावर चैनल के दो भागों से रिसाव के कारण फागपुर गांव की तरफ भारी मात्रा में पानी बहने लगा। जिससे ग्रामीण भी भयभीत हो गए। एनएचपीसी प्रशासन ने भारी मात्रा में हो रहे रिसाव को देखते हुए रविवार को दोपहर दो बजे टनकपुर बैराज से पावर चैनल को जाने वाले पानी गेट को बन्द कर दिया। पानी रिसाव के कारण विद्युत उत्पादन भी ठप्प हो गया है। जिससे एनएचपीसी को हर रोज लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इन दिनों शारदा नदी का जल स्तर बढ़ने से इस परियोजना में प्रतिदिन 90 से 96 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा था। इससे पूर्व भी इसी वर्ष 14 मार्च को पावर चैनल में रिसाव के कारण इसकी मरम्मत कराई गई थी। पूर्व में पावर चैनल के दबाव वाले लगभग चार सौ मीटर क्षेत्र में 10 करोड़ रुपयों की लागत से विदेशी इटली निर्मित फिल्म बिछाई गई थी। जहां यह फिल्म बिछाई गई थी , इसी से सटकर पावर चैनल के दो हिस्सों से पानी रिसाव तेजी से हो रहा था। पावर चैनल के बार-बार रिसाव होने के कारण जहां एनएचपीसी को करोड़ों रुपयों का नुकसान हो रहा है, वहीं चैनल से लगे गांव फागपुर को भी खतरा पैदा हो गया है। इधर एनएचपीसी के सहायक प्रबंधक एनएम गुप्ता की निगरानी में रिसाव के मरम्मत का कार्य युद्व स्तर पर शुरू हो गया है।


============================

2- धमाकों से उजाड़ी थिरांग की खुशहाली

Source: http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_4588270.html
Jun 29, 11:40 pm

उत्तरकाशी। गंगा के तट पर बसे छोटे से थिरांग गांव के लोगों की जिंदगी खुशी-खुशी गुजर रही थी, लेकिन बांध निर्माण के धमाकों ने यहां के वाशिंदों का सुख-चैन छीन लिया है। पावर हाउस निर्माण में हो रहे धमाकों से गांव के पुश्तैनी मकानों पर दरारें पड़ गई हैं। आम रास्ते उजड़ने से लोगों का घरों से निकलना भी मुश्किल हो रहा है।

गंगा तट पर बसे 18 परिवारों के छोटे से थिरांग गांव में अब से कुछ वर्ष पूर्व तक सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। यहां के लोगों की आर्थिक स्थिति सब्जी उत्पादन से आत्मनिर्भर थे पर अब पीने के पानी को भी तरस रहे हैं। 600 मेगावाट की लोहारीनाग-पाला जल विद्युत परियोजना पावर हाउस निर्माण गांव की तलहटी में हो रहा है। पावर हाउस निर्माण के दौरान धमाकों से गांव के पुश्तैनी भवनों पर दरारें आ गई है। ये भवन कभी भी भरभरा सकते हैं। पशुपालन चौपट हो गया है। गांव के ऊपरी हिस्से में देवदार, बांज, बुरांश के सघन पेड़ होने से गांव में मीठे पानी का जल स्रोत बहता था। पेड़ों की जड़ों से निकलने वाला यह पानी अब जमीन में समा गया है। गांव में सरकारी नलों से मटमैला पानी बह रहा है। एक बाल्टी पानी में आधी बाल्टी मिट्टी जमा हो रही है। लोग ऐसा ही पानी पीने को विवश हो रहे हैं। गांव के आम रास्ते धमाकों से भूस्खलन की जद में आ गए हैं। बांध में सब कुछ गंवाने के बाद थिरांग के लोग लोहारीनाग-पाला जल विद्युत परियोजना के पावर हाउस के समीप धरने पर जमे रहे। प्रदेश के स्वास्थ्य एवं जिले के प्रभारी मंत्री डा. रमेश पोखरियाल 'निशंक' के समक्ष लोगों ने अपनी समस्याएं रखी। गांव की हालत पर प्रभारी मंत्री ने भी सख्त अफसोस भी जताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि बांध से गांव तबाह होने हैं तो उत्तराखंड को ऐसे बांध नहीं चाहिए। उन्होंने डीएम को निर्देश दिए कि लोहारीनाग-पाला का काम तब तक रुकवा दिया जाए जब तक गांव की समस्याओं का अंत नहीं हो जाता। जिलाधिकारी आर.मीनाक्षी सुंदरम ने लोहारीनाग-पाला की कार्यदायी संस्था एनटीपीसी के अधिकारियों को वार्ता के लिए बुलाया है। भटवाड़ी ब्लाक प्रमुख सुरेश चौहान ने कहा कि गांव की समस्याओं का समाधान जल्द किया जाना चाहिए।

====================================

3- विद्युत उत्पादन में अनिश्चितता का दौर

Source: http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_4603104.html
Jul 04, 11:33 pm

देहरादून। समय से पहले बारिश उत्तराखंड की जल विद्युत इकाइयों के लिए वरदान साबित हुई है। जून में जल विद्युत इकाइयों को इसका भरपूर फायदा तो मिला पर कई इकाइयों में अभी समस्याएं हैं। इनका हल हल किए बिना विद्युत उत्पादन में अनिश्चितता का दौर खत्म होने की संभावना नहीं दिख रही है।

अपार संभावनाओं के बाद भी सूबे को जल विद्युत परियोजनाओं का अलग-अलग कारणों से पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। जल विद्युत निगम के एमडी आरपी थपलियाल का कहना है कि 304 मेगावाट क्षमता की मनेरी भाली फेज-दो परियोजना कमीशन होने के बाद राज्य विद्युत उत्पादन में आत्म निर्भरता की ओर बढ़ा है। इस परियोजना में अभी कई समस्याएं हैं। इकाई में उत्पादित बिजली ले जाने वाली 220 की दो लाइनें अक्सर ट्रिप कर जाती हैं। इससे विद्युत उत्पादन प्रभावित हो जाता है। तीसरी लाइन का प्रस्ताव अभी तक फाइनल नहीं हुआ है। उनका कहना था कि इस परियोजना का रिजर्वायर का प्रस्तावित स्तर 1108 मीटर है। इसके बाद ही पूरी क्षमता से उत्पादन हो पाएगा। इसके विपरीत अभी तक इसका स्तर 1104 मीटर तक ही रखना संभव हो सका है। उत्तर प्रदेश के नियंत्रण वाली 198 मेगावाट क्षमता की रामगंगा परियोजना सिंचाई आधारित है। इसे 15 जून से बंद कर दिया गया है और अब 15 अक्टूबर से ही विद्युत उत्पादन शुरू हो पाएगा। इस दौरान पानी को रिजर्वायर में एकत्र किया जाता है और जरूरत पड़ने पर सिंचाई के लिए छोड़ा जाता है। हरिद्वार का भीमगौड़ा बैराज, खटीमा जल विद्युत इकाई जैसी कई इकाइयों पर अभी उत्तर प्रदेश का ही नियंत्रण है। उत्तराखंड के नियंत्रण में आए बिना इन परियोजनाओं का भरपूर लाभ राज्य को नहीं मिल पा रहा है। इधर, हिमालयी नदियों की कामन समस्या गाद की है। गाद के कारण परियोजनाओं को बार-बार फ्लश करने के लिए बंद करना पड़ रहा है। इन्हीं कारणों से राज्य की जल विद्युत इकाइयों में बिजली उत्पादन में अनिश्चितता का दौर जारी है। ऐसे में कुछ परियोजनाओं को लेकर सामने आ रही समस्याओं को हल कर उत्पादन में अनिश्चितता को कम किया जा सकता है।

=================================

4- जल विद्युत परियोजना प्रभावितों ने निर्माण कार्य रोका

Source: http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_4603163.html
Jul 04, 11:33 pm

रुद्रप्रयाग। सिंगोली-भटवाड़ी जलविद्युत परियोजना पर कार्य कर रही एक कंपनी द्वारा ग्राम सभा फलई की छह सूत्रीय मांगों का निराकरण न करने से आक्रोशित ग्रामीणों ने निर्माण कार्य रोक दिया। प्रशासन व कंपनी के मध्य लिखित आश्वासन के बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ।

लार्सन एवं टूब्रो कंपनी द्वारा क्षेत्र में 99 मेघावाट जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य किया जा रहा है। परियोजना के लिए पूर्व में कंपनी द्वारा ग्राम सभा फलई से जंगल व जमीन खरीदी गई। इसके एवज में क्षेत्रीय बेरोजगारों को रोजगार व गांव तक दो किमी सड़क के निमार्ण के साथ अन्य महत्वपूर्ण मुददों पर कंपनी द्वारा सकारात्म कार्यवाही की बात कही थी, लेकिन अब कंपनी द्वारा ग्रामीणों से किए गए वायदों को नजरअंदाज कर निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है, जिससे आक्रोशित ग्रामीणों ने शुक्रवार को गांव के समीप कंपनी द्वारा किया जा रहे निर्माण कार्य को रोक दिया। प्रधान फलई अमरचंद्र का कहना है कि कंपनी द्वारा मांगों को नजरअंदाज करने पर ग्रामीणों ने यह कदम उठाया है। वहीं, काफी देर तक चले विवाद के बाद मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार ऊखीमठ कुवंर सिंह असवाल, कंपनी के अधिकारियों व प्रदर्शनकारियों में लिखित समझौता होने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो पाया। प्रदर्शनकारियों में ग्राम सभा फलई की समस्त महिलाएं व पुरुष मौजूद थे।

============================

5- जल विद्युत परियोजनाओं पर पंचायतों को हो अधिकार

Source: http://misc1.jag.in2.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_4627855.html
Jul 13, 11:26 pm

नई टिहरी (टिहरी गढ़वाल)। जल विद्युत परियोजनाओं व स्थानीय संसाधनों पर पंचायतों का अधिकार होना चाहिए। जनघोष उत्तराखंड ने जागो अभियान में नुक्कड़ सभा कर लोगों को यह जानकारियां दी।

लामबगड बदरीनाथ से शुरू हुए इस अभियान के सदस्यों ने रविवार को टिहरी बांध प्रभावित क्षेत्रों में नुक्कड सभाओं व जनसंपर्क के माध्यम से लोगों को जागरुक किया। वक्ताओं ने कहा कि अलकनंदा, मंदाकिनी व भागीरथी पर बनने वाली जल विद्युत परियोजनाओं से पूरा समुदाय प्रभावित हो रहा है। गडोलिया में पूर्व प्रधान राजेंद्र सिंह कुमांई ने कहा कि बांध प्रभावितों की आवाज दब गई है। लोगों को नाप भूमि के बदले तो मुआवजा दिया गया, लेकिन बेनाप भूमि व आजीविका के साधन यहां के जंगलों के एवज में कुछ नहीं मिला। जब तक स्थानीय संसाधनों पर पंचायतों को अधिकार नहीं दिया जाएगा परियोजनाएं जनपक्षीय नहीं हो सकती। अभियान में जनघोष के प्रदेश समन्वयक उमा शंकर बिष्ट, संयोजक राजेंद्र सिंह नेगी, सुरेंद्र भंडारी, शोभा नेगी, विमला गुंसाई, सुनीता पुरोहित, कुसुम पुंडीर, नरेंद्र बिष्ट, विजेंद्र सिंह रावत आदि शामिल थे।

====================================

6- चाई गांव के पुनर्वास की मांग उठेगी

Source: http://misc1.jag.in2.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_4627656.html
Jul 13, 11:25 pm

कौसानी (बागेश्वर)। उत्तराखंड नदी बचाओ संघर्ष समिति की वार्षिक बैठक में विष्णु प्रयाग जल विद्युत परियोजना से प्रभावित चाई गांव के पुनर्वास की मांग को प्रमुखता से उठाने का निर्णय लिया गया। बैठक में नदियों को बचाने के आंदोलन में और तेजी लाते हुए इससे जन जन को जोड़ने का निर्णय लिया गया। कौसानी में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि जल विद्युत परियोजनाओं ने लगातार गांवों को खतरा हो रहा है उसके बावजूद भी सरकार अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है। चाई गांव पर संकट आया है। उसके पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए। इस क्रम में सर्वप्रथम प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने का निर्णय लिया गया है। इस पर कार्यवाही न होने पर प्रदेश के सभी जिलों में आंदोलन किया जाएगा। अगस्त माह के अंतिम सप्ताह में जल यात्रा निकाली जाएगी। बैठक में तय हुआ कि दिसंबर माह में प्रदेश भर में करीब सभी नदी घाटियों में पदयात्रा निकाली जाएगी। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार की पुनर्वास नीति में उत्तराखंड के संदर्भ में कई खामियां है।

==========================

7- विलुप्ति के कगार पर पहुंचे घराट

Source: http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_4619352_1.html
Jul 10, 11:28 pm

पौड़ी गढ़वाल। एक जमाने में अनाज पीसने के प्रमुख साधनों में शुमार घराट (पनचक्की) वर्तमान समय में विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके है। आधुनिक तकनीक के उपयोग व सरकार की उपेक्षा से आज घराटों का अस्तित्व समाप्ति के कगार पर है। हालांकि अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (उरेडा) द्वारा घराट सुधारीकरण योजना के तहत घराटों को आधुनिक स्वरूप व उच्चीकरण किए जाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन जनपद पौड़ी में योजना के करीब पांच वर्ष बीतने के बाद महज सात ही घराटों को ही उच्चीकृत किया गया है।

पर्वतीय क्षेत्रों में अनाज पीसने के लिए पांच-छह दशक पूर्व तक पारंपरिक पनचक्कियों का उपयोग किया जाता था। वर्तमान में हिमालयी राज्यों में घराटों की संख्या ढाई लाख के आस-पास बताई जाती है, जबकि अकेले उत्तराखंड में इनकी संख्या पंद्रह हजार के लगभग बतायी जाती है। इनकी स्थिति वर्तमान में काफी दयनीय है। उरेडा द्वारा हाल में ही कराए गए सर्वेक्षण की मानें तो घराटों की दक्षता व क्षमता धीरे-धीरे कम हो रही है। इसका कारण इनकी घटती उपयोगिता है। वर्ष 2002 में उरेडा द्वारा घराटों का अस्तित्व बचाने के लिए घराट सुधारीकरण कार्यक्रम चलाया गया था। इसके तहत घराटों को चिन्हित कर आधुनिक उपकरणों से लैस करके इन्हें उपयोग में लाना है। योजना लागू होने के पांच वर्ष बाद भी पौड़ी जिले में मात्र सात घराटों को उपकरण से लैस कर उपयोग में लाया जा रहा है। जनपद के कुल पंद्रह ब्लाकों में वर्तमान में 672 घराट बंद तथा 295 घराट चालू हालत में हैं। घराट सुधारीकरण योजना के तहत लाभार्थी को विद्युत उत्पादन के लिए एक लाख व उपयोग में लाने के लिए 30 हजार तक का अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। बावजूद इसके घराटों का अस्तित्व समाप्ति के कगार पर है। जनपद के एक मात्र ब्लाक थैलीसैंण में ही सात घराट उपयोग में लाए जा रहे है। विभाग की शिथिलिता व घराटों के उपयोग के घटते चलन से आज भी अधिकांश लोग घराट से भी अनभिज्ञ हैं। विभाग का पौड़ी विकासखंड के अंतर्गत खांडा में मांडल घराट स्थापित करने का सपना भी साकार नहीं हो पा रहा है। इसमें तकनीकी खामियां उजागर हुई है। घराटों की घटती संख्या के बाबत विभाग के पास कोई सटीक जवाव नहीं है। विभाग का कहना है कि इस दिशा में प्रयास चल रहे है।

===============================

8- अलकनंदा में मलबा ही मलबा

Source: http://www.rashtriyasahara.com/RegionalDetailFrame.aspx?newsid=58799&cityname=Dehradoon&vcityname=????????
Jul 15, 02:29 am

देहरादून (एसएनबी)। अलकनंदा में हर रोज लाखों टन मलबा फेंकने वाली जीवीके कंपनी की श्रीनगर जल विघुत परियोजना का निर्माण कार्य ठप कर दिया गया है। इसके साथ ही सरकार ने अपर सचिव (ऊर्जा) सी भाष्कर को जांच सौंपी है। इस बार गंगा की हालत पर गुरूदास अग्रवाल या कोई दूसरा पर्यावरणविद् नहीं रोया बल्कि विश्व बैंक व दूसरी कई सामाजिक संस्थाओं ने अलकनंदा की पीड़ा को महसूस किया और सरकार को जगाने का प्रयास किया।
पुरखों के उद्धार व मानव कल्याण के लिए गंगा को स्वर्ग से धरती पर लाने वाले भगीरथ का ‘भगीरथ’ प्रयत्न इस अर्थवादी युग में धीरे-धीरे अपनी प्रासंगिकता खोता जा रहा है। इसके लिए राजनीतिक, आर्थिक व कुछ हद तक सामाजिक कारण भी जिम्मेदार हैं। भौतिकवादी युग में चकाचौंधभरी जीवन शैली में गंगा की में जीवनदायिनी कैद है तो कहीं पूंजीपतियों की पैसे की हवस को शांत करने के लिए मलबे के ढ़ेर में बदलती जा रही है। हालांकि यह सिलसिला वर्षों पहले से चल रहा है लेकिन जीवीके कंपनी का नाम इसमें हाल ही में जुड़ा है। विभागीय जानकारी के मुताबिक पिछले महीने विश्व बैंक की टीम ने 300 मेगावाट क्षमता की श्रीनगर जल विघुत परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया। टीम ने शासन को अवगत कराया कि परियोजना के निर्माण में पहाड़ काटकर सारा मलबा अलकनंदा नदी में फेंका जा रहा है जिससे गंगा का प्रवाह तो रूक ही रहा है, बहाव में भी मलबा जा रहा है। इसके अलावा रूलक व दूसरी स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी जीवीके के इस कार्य पर घोर आपत्ति जताते हुए परियोजना का कार्य जारी रहने की स्थिति में आंदोलन की चेतावनी दी है। इस बारे में उन्होंने सचिव (ऊर्जा) शत्रुघ्न सिंह से भी मुलाकात की।
ऊर्जा सचिव ने पूछे जाने पर बताया कि विश्व बैंक व कुछ सामाजिक संस्थाओं के लोगों ने श्रीनगर परियोजना के निर्माण कार्य पर इस आधार पर आपत्ति जताई कि पहाड़ काट कर सारा मलबा अलकनंदा नदी में फेंका जा रहा है। इससे नदी मलबे के ढेर में तब्दील होती जा रही है। सचिव ने कहा कि टीम ने कुछ साक्ष्य भी दिखाये। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन स्तर पर अपर सचिव (ऊर्जा) सी. भाष्कर के नेतृत्व में एक जांच दल स्थलीय निरीक्षण के लिए भेजा जा रहा है।

============================

9- जलविद्युत परियोजना का कार्य हुआ तो आंदोलन

Source: http://misc1.jag.in2.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_4655102_1.html
Jul 22, 11:37 pm

देवाल (चमोली)। 300 मेगावाट देवसारी जलविद्युत परियोजना का सर्वे को लेकर चला आ रहा विवाद फिर गहराने लगा है। सरकोट के ग्रामीणों ने योजना के सर्वे व निर्माण का विरोध का निर्णय लिया है।

सरकोट के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को भेजे ज्ञापन में कहा है कि भूकंप की दृष्टि से यह अति संवेदनशील क्षेत्र है और पहाड़ पर बांध बनाना भविष्य के लिए खतरा साबित हो सकता है। ग्रामीणों ने सतलुज कंपनी के अधिकारियों पर ग्रामीणों को गुमराह करने का आरोप लगाते कहा कि कंपनी जनता को विश्वास में लिए बगैर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत सरकोट के सिविल वन पंचायत व नापभूमि में सर्वे नहीं करने दिया जाएगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि कंपनी ने जबरन कार्य किया तो ग्रामीण धरना प्रदर्शन आदि करने पर विवश होंगे जिसकी जिम्मेदारी कंपनी व प्रशासन की होगी। ज्ञापन में संघर्ष समिति अध्यक्ष रमेश कुनियाल, लीलाधर, विनोद, घनश्याम, हरीशचंद्र, भूपेश पांडे, केसी राम, नंदन गडिया, बैजदत्त, बलवंत गुसाई, मदन मोहन आदि के हस्ताक्षर हैं।

============================

10- सोने के अंडे नहीं, मुर्गी पर नजर

Source: http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_4663984_1.html
Jul 25, 11:28 pm

देहरादून। ऊर्जा प्रदेश की 12 जलविद्युत परियोजनाओं का जीर्णोद्धार पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप मोड में करने के राज्य सरकार के फैसले पर गरमा-गरम बहस छिड़ गई है। कैबिनेट के इस निर्णय के खिलाफ विपक्षी दल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि विद्युत निगमों से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी संगठन भी मुखर हो गये हैं। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार की नजर सोने के 'अंडे' नहीं, बल्कि सोने के अंडे देने वाली 'मुर्गियों' पर है। ऐसा हुआ तो प्रदेश के कुल उत्पादन का करीब 78 फीसदी बिजली पैदा करने वाली ये परियोजनाएं निजी हाथों में चली जाएंगी, जिसका खामियाजा राज्य को भुगतना पड़ेगा।

राज्य की 12 महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाओं का जीर्णोद्धार पीपीपी मोड में करवाने का राज्य सरकार का फैसला विपक्षी दल कांग्रेस व कर्मचारी संगठनों के गले नहीं उतर रहा। पीपीपी मोड को लेकर उठी चिंताओं के पीछे कांग्रेस व कर्मचारी संगठनों के पास तर्क भी मौजूद हैं। दरअसल, वर्तमान में प्रदेश की अपनी जलविद्युत परियोजनाओं से सालाना 3500 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होता है। इसमें से करीब 2723 मि.यू. बिजली उन परियोजनाओं से पैदा होती है, जिनका पीपीपी मोड में जीर्णोद्धार करवाने की तैयारी चल रही है। यानी, राज्य के कुल बिजली उत्पादन में इन परियोजनाओं की 77.8 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि करीब 1100 करोड़ की लागत से जीर्णोद्धार होने के बाद इनकी उम्र बढ़ने के साथ ही उत्पादन में भी 656 मि.यू. की बढोतरी हो जाएगी। मौजूदा स्थिति यह है कि इनमें से आधा दर्जन परियोजनाओं के जीर्णोद्धार की डीपीआर बनाने को न सिर्फ एग्रीमेंट हो चुका है, बल्कि केएफडब्लू नामक संस्था से लोन भी लगभग स्वीकृत है। पथरी, मोहम्मदपुर प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार है, तो गलोगी के जीर्णोद्धार का काम शुरू हो चुका है। खटीमा प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार की जा रही है। कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री शंकर चंद रमोला का कहना है कि जब इन परियोजनाओं के बूते राज्य सरकार के अपने जलविद्युत निगम को वर्ष 2007-08 में 40 करोड़ रुपये का लाभ हुआ, तो फिर इन्हें निजी हाथों में सौंपने के पीछे सरकार की क्या मंशा है। उधर, ऊर्जा आफिसर्स, सुपरवाइजर एंड स्टाफ एसोसिएशन और ऊर्जा अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति भी इस निर्णय की खिलाफ मुखर हो चुके हैं।

============================

11- बोल्डर गिरने से 1200 किलोवाट की कुलागाड़ जल विद्युत परियोजना क्षतिग्रस्त

Source: http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_4667236_1.html
Jul 26, 11:34 pm

पिथौरागढ़: जिले की सीमांत तहसीलों में वर्षा का कहर जारी है। शनिवार को हुए भूस्खलन से धारचूला में 1200 किलोवाट की जल विद्युत परियोजना क्षतिग्रस्त हो गयी। परियोजना में लगातार मलबा गिर रहा है। प्रशासन ने खतरे को देखते हुए आवासीय परिसर खाली करा दिये है। डीडीहाट में भारी वर्षा से तीन मकान और एक पैदल पुल ध्वस्त हो गया है।

धारचूला: तहसील क्षेत्र में हो रही वर्षा से कूलागाड़ क्षेत्र में भारी भू-स्खलन हुआ, जिससे 1200 किलोवाट की जल विद्युत योजना का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। परियोजना के अधिशासी अभियंता ने बताया कि मलबा गिरने से 500 केवीए के दो ट्रांसफार्मर, 1500 केवीए का एक ट्रांसफार्मर, सेण्ट्री फ्यूजिंग मशीन, 33 केवी आपूर्ति लाइन, 32केवीए ब्रेकर, पांच टावर और पेन स्टाक पाइन लाइन ध्वस्त हो गयी है। परियोजना को 50 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। परियोजना में लगातार मलबा गिर रहा है और परियोजना को खतरा बना हुआ है। खतरे को देखते हुए परियोजना के आवासीय परिसर खाली करा लिये गये है। तहसीलदार एमआर आर्या ने अपराह्न में परियोजना का मौका मुआयना किया और सुरक्षा के लिए आवश्यक निर्देश दिये। मलबा हटाने के लिए ग्रिफ और एनएचपीसी के डोजर लगाये गये है।

डीडीहाट: तहसील क्षेत्र में भारी वर्षा से दूनाकोट क्षेत्र में अटलगांव और भूलगांव को जोड़ने के लिए बना पैदल पुल ध्वस्त हो गया है। सानदेव में नारायण राम, नून में कल्याण सिंह और चन्याल गांव में खीम राम का मकान ध्वस्त हो गये। तीनों मकान दोपहर में ध्वस्त हुए। घटना के वक्त मकानों में कोई नहीं था जिससे जनहानि नहीं हुई अलबत्ता मकानों में रखा सामान नष्ट हो गया। प्रभावितों ने इसकी सूचना तहसील को दे दी है। तहसीलदार के निर्देश पर पटवारियों ने क्षति आंकलन का कार्य शुरू कर दिया है।

============================

12- मनेरी भाली: ठगे गए प्रभावित बेरोजगार

Source: http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_4679448.html
Jul 30, 11:29 pm

उत्तरकाशी। मनेरी भाली फेज-टू का निर्माण पूरा होने के बाद ग्रामीण अपने को ठगे महसूस कर रह हैं। परियोजना निर्माण तक उन्हें रोजगार का आश्वासन मिला रहा किन्तु निर्माण पूरा होने के रोजगार की मांग कर रहे बेरोजगारों को रोटी के बजाय जेल भेजा गया है।

304 मेगावाट की मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना द्वितीय चरण निर्माण के लिए जमीन लेते वक्त काश्तकारों को विश्वास दिलाया गया कि जमीन के बदले प्रभावित काश्तकारों को रोजगार दिया गया। सिंचाई विभाग के आला अफसरों के इस आश्वासन पर काश्तकार उम्मीद में थे कि रोजगार मिलेगा किन्तु फेज-टू का निर्माण पूरा होने के बाद परियोजना उत्तराखंड जल विद्युत निगम को स्थांनातरित कर दी गई। परियोजना स्थांनातरण के साथ ही कार्यरत स्थानीय बेरोजगारों से काम छीन लिया गया। रोजगार छीनने के बाद बेरोजगार रोजगार की मांग को लेकर गत तीन महीने से धरासू पावर हाउस के पास धरने पर थे। इस आंदोलन के दौरान बेरोजगारों ने गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम भी किया। इस पर काश्तकारों को आश्वासनों का घूंट पिलाने वाली सरकार ने कार्य से विरत किए गए 35 बेरोजगारों के खिलाफ धारा 147, 332 व 341 में मुकदमा दर्ज करवाया गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद अब तक 26 बेरोजगार युवकों को पुलिस सलाखों के पीछे डाल चुकी है। बेरोजगारों की गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में कड़ा रोष है। ग्रामीणों ने अब परियोजना से विद्युत उत्पादन रोकने की चेतावनी दी है। यमुनोत्री क्षेत्र के विधायक केदार सिंह रावत ने मुख्यमंत्री को सौंपे पत्र में उल्लेख किया है कि बेरोजगारों को रोजगार के बजाय जेल में डालना सरासर गलत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गिरफ्तार बेरोजगारों को तीन के भीतर रिहा नहीं किया जाता तो ग्रामीणों के आंदोलन में शामिल होकर परियोजना का उत्पादन रोक देंगे। विधायक के साथ ही स्थानीय युवा भी आक्रोशित हैं। छात्र नेता शैलेन्द्र महंत, धीरेन्द्र सिंह भंडारी, धनवीर चंद रमोला, विजय प्रताप भंडारी, कुलदीप कलूड़ा, सुनील कुमार कुमांई, श्रीमती सरोज शाह, रविन्द्र भंडारी, आलेन्द्र भंडारी व शिवराज पंवार ने भी मुख्यमंत्री को आंदोलन की चेतावनी दी है। जमीन देने के बाद भूमिहीन हुए काश्तकारों आंदोलन की तैयारी में हैं। गांव-गांव में बैठक के बाद लोगों ने धरासू पावर हाउस में डेरा डालने का निर्णय लिया है।