1- बिजली परियोजना के जीएम को एसडीएम ने फटकारा

(उत्तर भारत हाइड्रो पावर कारपोरेशन की बिजली परियोजना - Danik Jagran, December 13, 2007)

2- फेज-टू की झील ने उड़ाई नींद

(मनेरी भाली परियोजना फेज-टू- Danik Jagran, December 12, 2007)

3- फेज-टू : कमाई पर होगा पावर फाइनेंस का अधिकार

(मनेरी भाली परियोजना फेज-टू- Danik Jagran, December 05, 2007)

4- बांध की सुरक्षा दीवार पर पड़ी दरारें दे रही निर्माण की गवाही

(मनेरी भाली परियोजना फेज-टू- Danik Jagran, December 08, 2007)

5- हरे पेड़ों के कटान के खिलाफ ग्रामीणों ने उठाई आवाज

(लोहारीनाग-पाला जल विद्युत परियोजना - Danik Jagran, December 09, 2007)

6- विरही जलविद्युत परियोजना के खिलाफ महिलाएं लामबंद

(विरही जलविद्युत परियोजना - Danik Jagran, December 21, 2007)


1- बिजली परियोजना के जीएम को एसडीएम ने फटकारा

Source: http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_3985427.html
Dec 13, 02:32 am

कपकोट(बागेश्वर)। सौंग मुनार में ग्रामीणों द्वारा विगत 25 दिन से चलाये जा रहे आंदोलन के बाद प्रशासन भी हरकत में आ गया है। एसडीएम ने उत्तर भारत हाइड्रो पावर कारपोरेशन के जीएम से कहा है कि वह किसी भी क्षेत्र में कार्य करने से पहले प्रशासन को भविष्य की योजना से अवगत करायें। उधर ग्रामीणों का आंदोलन जारी है।

एसडीएम कपकोट हरवीर सिंह ने क्षेत्र का भ्रमण करने के पश्चात कंपनी के महाप्रबंधक को फटकार लगाते हुए कहा कि कंपनी के मजदूर जगह जगह खनन व रेता बजरी का चुगान कर रहे है लेकिन प्रशासन के पास कंपनी की वर्तमान व भविष्य की योजनाओं का प्रारूप तक नहीं है। उन्होंने शीघ्र योजना से प्रशासन को अवगत कराने का आदेश दिया। उधर बिजली परियोजना के खिलाफ सरयू बचाओ हक हकूक बचाओ संघर्ष समिति का सोंग में चलाया जा रहा आंदोलन जारी है। अनशन में प्रवीण राम, मोहन राम, दरवान सिंह, मोहन सिंह, तारा सिंह बैठे। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन पर आंदोलन को तोड़ने का आरोप लगाते हुए बिजली परियोजना का कार्य स्थगित रखने की मांग की।




2- फेज-टू की झील ने उड़ाई नींद

Source: http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_3982705.html
Dec 12, 02:33 am

उत्तरकाशी। शिव नगरी वरुणावत भूस्खलन से मटियामेट होने के बाद अब फेज-टू की झील जोशियाड़ा को निगलने जा रही है। सरकारी महकमे ने लोगों से वायदा किया है कि झील के दोनों तटों पर 1111 मीटर तक दीवार फिलिंग कर उस पर बेघर हो रहे लोगों को बसाया जाएगा किन्तु यह गले नहीं उतर रहा।

पुरानी टिहरी के जल मग्न होने के बाद टिहरी रियासत का दूसरा सबसे बड़ा शहर उत्तरकाशी भी जल संकट में घिर रहा है। वर्ष 2003 में वरुणावत भूस्खलन में शहर के आलीशान भवन टूट कर बिखर गए। शहर का यह इलाका अब सबसे बुरे क्षेत्र में शामिल है। यहां रिसते वरुणावत से हल्की बारिश में लगातार कीचड़ बहता है और धूप खिल जाए तो धूल बादलों की तर्ज पर आसमान में छा जाती है। उत्तरकाशी के टूटने के बाद जोशियाड़ा बाजार की तर्ज पर आबाद हुआ। यहां की रौनक चौगुनी हुई किन्तु कुछ दिन की खुशियों के बाद जोशियाड़ा पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं। मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना द्वितीय चरण की झील जोशियाड़ा को डूबा देगी। वर्ष 1978 में बांध निर्माण की कवायद शुरू हुई और 28 सालों में जोशियाड़ा के लोगों को अंधेरे में रखा गया। उन्हें यह तक नहीं बताया गया कि उनके मकान पानी में डूब जाएंगे। नंवबर माह में परियोजना की टेस्टिंग शुरू होते ही मामला तब खुलकर सामने आया जब पानी तेजी से ऊपर चढ़ने लगा। झील का जल स्तर देखने के बाद लोगों को पता चला कि जोशियाड़ा जल मग्न हो जाएगा। हल्ला होने के बाद सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता मुकेश मोहन ने लोगों को बताया कि जोशियाड़ा के 67 भवन जल मग्न हो जाएंगे। गुस्साए लोगों ने जिलाधिकारी की चौखट पर दस्तक दी। इसके बाद क्षेत्रीय विधायक गोपाल सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि झील के 1111 मीटर तक दीवार का निर्माण का उसमें मिट्टी भरी जाएंगी और मिट्टी के समतलीकरण कर उस पर प्रभावितों को जमीन का आवंटन किया जाएगा। इस हवाई योजना के बाद लोग चुप तो हो गए किन्तु कई लोगों का सिर चकरा रहा है कि आखिर कच्ची मिट्टी पर बने घर कितने दिन टिक पाएंगे और इस योजना को बनने में कितना समय लगेगा।




3- फेज-टू : कमाई पर होगा पावर फाइनेंस का अधिकार

Source: http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_3962199.html
Dec 05, 02:21 am

उत्तरकाशी। मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना फेज-टू की कमाई दस साल तक पावर फाइनेंस कारपोरेशन की झोली में जाएगी। परियोजना निर्माण अवधि बढ़ने से यह स्थिति पैदा हुई और अब इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही की तैयारी चल रही है।

304 मेगावाट की मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना द्वितीय चरण के रुके हुए कार्यो के लिए वर्ष 2001 में पावर फाइनेंस कारपोरेशन से आठ सौ करोड़ रुपये कर्ज लिए गए। वर्ष 2002 में इसके स्वीकृत होने के बाद परियोजना का निर्माण शुरू हुआ। तब सरकार ने घोषणा की थी कि वर्ष 2005 में परियोजना विद्युत उत्पादन शुरू कर देगी। इस अवधि में परियोजना का निर्माण पूरा नहीं हुआ और नौ सौ करोड़ रुपये परियोजना निर्माण के लिए फिर ऋण लिया गया, लेकिन कर्ज की यह धनराशि भी अब समाप्त हो चुकी है। सरकार ने पावर फाइनेंस कारपोरेशन से पुन: 400 करोड़ का ऋण लिया। मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना द्वितीय चरण के लिए ऋण ली गई धनराशि 11 प्रतिशत ब्याज समेत सरकार को चुकता करना पड़ेगा। इसे चुकता करने में उत्तराखंड जैसे गरीब राज्य को दस साल का समय लगेगा यानि परियोजना की दस साल तक होने वाली कमाई पर पावर फाइनेंस कारपोरेशन का अधिकार होगा। उत्तराखंड जल विद्युत निगम के अध्यक्ष योगेंद्र प्रसाद व चीफ इंजीनियर डीसी शर्मा ने बताया कि परियोजना की समय सीमा बढ़ने से परियोजना की लागत बढ़ी। मामले की जांच की जा रही है। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता श्री शर्मा ने कहा कि इस मामले पर निश्चित रूप से कार्यवाही होगी और दोषी अधिकारियों को कतई नहीं बख्शा जाएगा।






4-बांध की सुरक्षा दीवार पर पड़ी दरारें दे रही निर्माण की गवाही

Source: http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_3971379.html
Dec 08, 02:33 am

उत्तरकाशी। मनेरी भाली जल विद्युत परियोजना द्वितीय चरण के बैराज स्थल पर किए गए निर्माण का अंदाजा इसकी सुरक्षा दीवार पड़ी दरारों से लगाया जा सकता है। मुख्य अभियंता सिंचाई विभाग ने कहा कि मामले को वह गंभीरता से लेंगे।

करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह सुरक्षा दीवार कुछ दिन पहले धंस गई थी और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने दीवार की धंसी हुई जमीन पर मिट्टी बिछा दी थी। उत्तराखंड जल विद्युत निगम के अध्यक्ष योगेंद्र प्रसाद, सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर डीसी शर्मा व अन्य अधिकारियों के दौरे से पहले इन दरारों को मिट्टी से पाट दिया गया। क्षेत्र पंचायत सदस्य विजेंद्र नौटियाल, ग्राम प्रधान जोशियाड़ा राम सिंह गुसांई समेत अन्य ने सिंचाई विभाग से इसकी शिकायत की, मगर विभागीय अधिकारी मौन साधे हैं। बांध के तमाम मामलों को लेकर जनप्रतिनिधि सीधे तौर पर अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग मुकेश मोहन को सवालों के कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। जब चीफ इंजीनियर सिंचाई विभाग से इस बाबत बातचीत की गई तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बांध की सुरक्षा के प्रश्न के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।






5- हरे पेड़ों के कटान के खिलाफ ग्रामीणों ने उठाई आवाज

Source: http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_3974246.html
Dec 09, 02:14 am

उत्तरकाशी। लोहारीनाग-पाला जल विद्युत परियोजना के निर्माण के लिए हरे पेड़ों के कटान के विरोध में ग्राम पंचायत पाला ने भी कमर कस ली है। ग्रामीणों ने ऐलान किया कि पेड़ों के कटान को रोकने के लिए वे सामाजिक संगठनों का पूरा साथ देंगे।

लोहारीनाग-पाला जल विद्युत परियोजना निर्माण के लिए पेड़ों के कटान के विरोध में हिमालयी भागीरथी आश्रम मातली रक्षा सूत्र आंदोलन की महिलाओं ने जोरदार विरोध किया। विरोध के बाद कई अन्य सामाजिक संगठन भी इस मुद्दे को लेकर लामबंद हुए। ग्राम प्रधान पाला ने भी अब हरे पेड़ों के कटान के विरोध में कमर कस ली है। पाला के ग्राम प्रधान ने प्रभागीय वनाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में उल्लेख किया है कि पाला गांव में हरे पेड़ों का कटान तत्काल रोका जाए अन्यथा ग्रामीण पेड़ों को बचाने के लिए आंदोलन चलाएंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर काटे जा रहे पड़ों पर रक्षा सूत्र बांधे गए हैं और अब वे पेड़ नहीं कटने देंगे। रक्षा सूत्र की महिलाओं ने जिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में उल्लेख किया है कि पाला-मनेरी जल विद्युत परियोजना की टेस्टिंग के बाद पाला गांव के शीर्ष पर स्थित पहाड़ी से दो सौ स्थानों पर भूस्खलन सक्रिय है। भूस्खलन से गांव कभी भी मटियामेट हो सकता है। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की कि गांव की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।






6- विरही जलविद्युत परियोजना के खिलाफ महिलाएं लामबंद

Source: http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_4006044.html
Dec 20, 02:34 am

गोपेश्वर (चमोली)। विरही गंगा जल विद्युत परियोजना के लिए ग्रामीणों की पुश्तैनी भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है। अब ग्रामीण व महिलाएं मंगल दल के बैनर तले इसके खिलाफ लामबंद हो गए हैं। महिला मंगल दल समेत ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की।

ग्रामीणों की काश्तकारी व पुश्तैनी भूमि पर विरही जल विद्युत परियोजना की निर्माणदायी संस्था द्वारा अतिक्रमण किए जाने का विरोध ग्रामीणों द्वारा लम्बे समय से किया जा रहा है। कई बार शासन-प्रशासन को लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराने के बाद भी कार्यवाही न होते देख ग्रामीण महिलाओं ने मंगल दल के नेतृत्व में आंदोलन शुरू किया था, पर जिलाधिकारी के आश्वासन पर आंदोलन स्थगित कर दिया गया। जिलाधिकारी के आश्वासन के बाद भी कोई कार्रवाही नहीं हो सकी। सरपंच वन पंचायत एवं महिला मंगल दल श्रीकोट की अध्यक्ष श्रीमती जशोदा देवी ने बताया कि डीएम के आश्वासन पर कार्रवाही न होने तथा कंपनी द्वारा गांव की काश्तकारी भूमि पर अतिक्रमण करने के साथ ही अब सुरंग निर्माण समेत अन्य कार्य किए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। कंपनी के अधिकारियों को भी इस संबंध में अवगत कराया जा चुका है। दल ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी समेत क्षेत्रीय विधायक को पत्र लिख चेतावनी दी कि शीघ्र सकारात्मक कार्रवाही न हुई तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।