1- मजदूरों ने गैमन इंडिया का काम भी किया बंद

(निर्माणाधीन 800 मेगावाट की कोलबांध परियोजना - Danik Jagran, July 15, 2008)

2- ब्लास्टिंग से लोगों के घरों को नुकसान

(निर्माणाधीन 100 मेगावाट की सैंज परियोजना - Danik Jagran, July 22, 2008)

3- वन व विद्युत विभाग आमने-सामने

(126 मेगावाट की लारजी परियोजना - Danik Jagran, July 23, 2008)


1- मजदूरों ने गैमन इंडिया का काम भी किया बंद

Source: http://in.jagran.yahoo.com/news/local/himachalpradesh/4_11_4632976_1.html
July 15, 09:23 pm

सुंदरनगर-सतलुज नदी पर निर्माणाधीन आठ सौ मैगावाट की कोलबांध परियोजना के निर्माण में लगी विभिन्न कंपनियों व उनके कामगारों के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसकी एवज में मंगलवार से मजदूरों ने बांध के पावर हाउस का निर्माण कर रही गैमन इंडिया का काम भी अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है जबकि डिसिल्टिग अरेंजमेंट का काम कर रही एफकान कंपनी का काम मजदूरों ने पहले से ही बंद कर रखा है। कोलबांध में मजदूरों के भत्तों में कटौती का विवाद मई से गहराया है जिसके बाद मजदूर भत्तों में बहाली को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। हालांकि इसके लिए छह जून से मजदूरों ने मजदूरों ने क्रमिक अनशन की शुरू किया था जो 14 जुलाई तक चला लेकिन कोई भी कंपनी मजदूरों से बात करने के लिए आगे नहीं आई। इसके लिए पहले मजदूरों ने एफकान का काम बंद किया लेकिन गैमन इंडिया के साथ वार्ता जारी थी लेकिन कोई नतीजा न निकलने पर मजदूरों ने मंगलवार से ही गैमन कंपनी का काम बंद करने का एलान कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि साल 2005 में कोलबांध के निर्माण में लगी कंपनियों ने मजदूरों के साथ तीन साल करार किया था जो सितंबर 2008 तक वैद्य था। इस करार में मजदूरों को समस्त भत्ते देने का जिक्र किया गया था लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा मजदूरों की दिहाड़ी में वृद्धि करने पर कंपनियों ने फरवरी में मजदूरों को नोटिस थमा कर करार को मार्च 2008 तक रखा तथा जिसके अनुसार अप्रैल 2008 के वेतन के साथ मजदूरों को अतिरिक्त दिहाड़ी तो दी गई लेकिन भत्तों में कटौती की गई जिसका मजदूरों ने विरोध किया।

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जारी रहेगी हड़ताल : संतोष कुमार

कोलडैम वर्कर यूनियन के महासचिव संतोष कुमार ने बताया कि बार-बार मजदूरों के हितों से खिलवाड़ बर्दाशत नहीं किया जाएगा। कंपनियां मजदूरों के बारे में जरा भी नहीं सोचती तथा श्रम कानूनों की सरेआम धज्जियां उड़ाती हैं। उन्होंने कहा कि यह मजदूरों के हक की लड़ाई है जिससे मजदूर पीछे नहीं हटेंगे।

विवाद सुलझाने के प्रयत्न होंगे : प्रदीप शर्मा

परियोजना के निर्माण में प्रमुख रुप से लगी एनटीपीसी के मानव संसाधन विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक प्रवीण गर्ग का कहना है कि विवाद सुलझाने का हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

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2- ब्लास्टिंग से लोगों के घरों को नुकसान

Source: http://in.jagran.yahoo.com/news/local/himachalpradesh/4_11_4653966_1.html
July 22, 10:18 pm

सैंज : सैंज में 100 मैगावाट परियोजना का टनल टैक्सिंग का कार्य शुरू किया गया है। इसके लिए की गई ब्लास्टिंग से लोगों के घरों को नुक्सान हो रहा है। प्रभावित विस्थापित संघ के प्रधान उत्तम सिंह ने बताया कि टनल का कार्य कर रहे ठेकेदार द्वारा बिना सूचना दिए ब्लास्टिंग की जा रही है जिससे लोगों के घरों को नुक्सान हो रहा है। इस नुक्सान को देखते हुए गांव के ग्रामीणों ने एक ग्रामीण विकास सभा बुलाई। इस सभा द्वारा लोगों की समस्याओं को परियोजना प्रबंधकों को नुक्सान से अवगत करवाने के लिए इस सभा को बुलाया गया। प्रधान उत्तम सिंह ने बताया कि जब तक लोगों को मकानों का मुआवजा नहीं दिया जाता तब तक कोई भी कार्य नहीं करने दिया जाएगा। अगर बिना मुआवजा दिए काम करने की कोशिश की गई तो प्रभावितों को कड़े से कड़ा कदम उठाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इसका जो भी नुक्सान होगा उसका जिम्मेदार परियोजना प्रबंधक ही होंगे।

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3- वन व विद्युत विभाग आमने-सामने

Source: http://in.jagran.yahoo.com/news/local/himachalpradesh/4_11_4657220.html
July 23, 09:55 pm

रणवीर ठाकुर, कुल्लू

प्रदेश विद्युत विभाग के लारजी प्रोजेक्ट में रोके गए पानी से नए पेड़ों को भी नुकसान पहुंचना शुरू हो गया है। इस मसले पर वन व विद्युत विभाग आमने-समाने आ गए हैं। वन विभाग ने विद्युत विभाग को 3.20 लाख रुपये भरने का नोटिस थमा दिया है। इसमें वन विभाग ने लिखा है जो धन राशि पेड़ों की बनती है। उसे विभाग शीघ्र जमा करवा दे नहीं तो कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। यही नहीं वन विभाग पेड़ों के लगातार सूखने से परेशान है। प्रोजेक्ट का पानी धीरे-धीरे उपर पेड़ों की बढ़ रहा है। इससे पेड़ों को और भी नुकसान होने की बात कही जा रही है। पर्यावरणविद् किशन लाल का कहना है कि विद्युत विभाग को तुरंत पानी छोड़ देना चाहिए जिससे पेड़ों को रहे नुक्सान से बचाया जा सके। इधर वन विभाग के डीएफओ बीएस राणा ने बताया कि विद्युत परियोजना के अधिकारी के नाम पहले भी दो बार पत्र लिखा गया है व राशि जमा करवाने को कहा है,लेकिन अभी तक यह जमा नहीं करवाई गई है। विभाग को पानी कम करने के लिए भी कहा गया है। बिजली विभाग के अधिशाषी अभियंता भरत दर्शन ने कहा कि वन विभाग को हुए पेड़ों का मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने मना कि पेड़ों का नुकसान हो रहा है व पानी भी कम कर रहें हैं।